वक़्त के कुछ पल

Brain Cuddle

कुछ लम्हे ऐसे जो दिल को छू जाए,
कुछ बातें ऐसी जो रूह को जगाये.
वो उगता सूरज, वो ढलती शाम
जो मुझे पुकार कर दे गयी कई बैगाम.

वो रेल की रफ़्तार,
वो पटरी की सरसराहट
वो बहार का सन्नाटा,
जिससे मंसूख कर रही अंदर के शोर की आहात.

उस पल में कुछ ऐसा हो गया,
न चाहते हुए भी मन मचल गया
एक डर , एक सोच ने मुझे जकड लिया,
क्या है इस शोर का छोर ये सवाल अंदर घर कर गया.

इस दिन्दगी का अर्थ क्या है , इस सफर का अंत क्या है
हर दिन क्या बस यु ही गुज़र जाएगा , इस हर सुबह का तर्क क्या है.
क्या प्रकृति का हर अंश कोई सन्देश लिए है,
इस सन्देश की व्याख्या का मूल क्या है

ये है इंसानो की दुनिया , हमारे जैसे अनेखौ यहा है
तो फिर ये घमंड , ये इर्षा, ये श्रेष्ठा का विषय क्या है
हर ख़ुशी में छिपा एक दर्द,
ज़िन्दगी संपूर्ण, तो इस डर का प्रारम्भ क्या है

सूरज की पहली किरण जो लाई सुबह का सन्देश
उससे छोड़ हम लगे है दौड़ में, जीवन से उम्मीद क्या है.
दिल में अनेखो ख्वाहिशे लिए,
बस जी रहे है इस काल में, ना जाने हमारा लक्ष्य क्या है

क्यों आराम को हम भूल मानने लग गए ,
एक पल रुक कर सांस लेना, असफलता का प्रमाण सा है,
ज़रा एकांत को चख कर तो देखो मेरे दोस्त,
समझ आएगा की ज़िन्दगी को जीना का मज़ा क्या है

दो दिन का है ये पल , फिर ना जाने क्या होगा ,
तो इस तरह मन मार कर काम करने की वजह क्या है
जियो दिन्दगी, नये रिश्ते अपनाओ , समझो
हर पल को जीने की ख़ुशी क्या है

संकट से डरना, गम से भागना,
ये रवैया कायरो का है,
पहला कदम , नयी शुरवात ,
जानो जीतने की ख़ुशी क्या है

गीता का तात्पर्य, क़ुरान का अर्थ, बाइदबल का मीनिंग
सबका सार सामान ही तो है,
फिर भी हम लड़े जा रहे हैं, धर्म के नाम पे
इस मूर्खता का ज्ञान क्या है

मेरी मानो तो , आज एक काम करना,
सुबह उठकर खिड़की खोलकर सौंधी सी धुप चखना
दो पल परिवेश का बोध करके,
फिर सोचना की इस एहसास का सामर्थ्थ क्या है

जब दफ्तर को जाओ , तो फिर दो पल देना,
यु ही रास्ते में चलते किसी अजनबी को एक पैगाम देना
मुस्कुराते हुए कहना ज़िन्दगी गुलज़ार है,
फिर देखना होंठो की उस मुस्कान की प्रतिक्रिया क्या है

घर वापस लौटते वक़्त , दो पल देना,
ऑफिस की थकान को गाडी में ही रहने देने,
घर वालो के साथ जाकर कुछ वक़्त बिताने के बाद ,
फिर देखना ज़िन्दगी की मुस्कराहट की कीमत क्या है

ज़िन्दगी तो आसान थी, हमने उलझा दी,
पैसे और शौहरत के लिए, असहज रिश्ते बना दिए ,
अब भी वक़्त है वापस लौट आओ ,
ना जाने देर होने की कीमत क्या है.